Sunday, January 25, 2009

मोहल्ला ने फैलाई अश्लीलता ?

देश का बहुचर्चित ब्लॉग ''मोहल्ला'' कुछ और चर्चित होना होना चाहता था सो भी गया,लेकिन उसने सीधा फायदा सविता भाभी.कॉम को भी पंहुचा दिया! मोहल्ला ब्लॉग के नियमित पाठक सविता भाभी के शोध को मोहल्ला पर देखकर भड़क गए और कुछ ऐसा कह गए जो शायद नहीं कहना चाहिए ,पर इसमें गलती उस पाठकों की कुछ नहीं क्योंकि उन ने तो मोहल्ला के अच्छे लेखों पर उसकी तारीफ भी की है ,उन्हें अच्छा नहीं लगा तो उन्होंने इस लेख की बुराई कर दी!!!हलाकि जिस तरह से यह लेख मोहल्ला पर प्रकाशित किया गया उससे यह प्रतीत हो रहा था,की सविता भाभी भी अवनीश जी का ही है!!जी हां क्योंकि बढ़िया उस नंगापन फैलाने वाले वेबसाइट की लिंक को इस तरह से सजाया गया था की जैसे अविनाश जी मोहल्ला से पाठक वंहा भेजने की कोशिश कर रहे है !! जबकि यही काम बिना लिंक दिए भी हो सकता था !!!अविनाश जी,का लिंक देकर शोध को दर्शाना उन्हें इतना महंगा पड़ा की उनके लिए लोगों ने कुछ इस तरह से तारीफ पहुंचाई !!
एक नजर तारीफों पर !!!
anil yadav said...
बहुत अच्छे भाई लोग सविता भाभी को लोकप्रिय बनाने में आप लोगों का प्रयास सराहनीय है....मोहल्ले में इतनी गंभीर चर्चा को बढाने के लिए अविनाश जी भी बधाई के पात्र हैं....और सविता भाभी को हिट्स मिलने में भले ही कुछ कमी रह जाए ....लेकिन अविनाश जी को जरूर पता है कि मोहल्ले पर हिट्स की संख्या कैसे बढाई जाए इसीलिए अक्सर वो नये नये शिगूफों को हवा देते रहते हैं....बहुत जानदार ....
Debashish said...
अविनाश टैबलायड से जुड़े हैं आजकल, तो विषय का जंचना अस्वावाभिक नहीं। यह सिद्ध करने में क्या देर लगायें कि जिस तरह मुहल्ला के पहले हिन्दी के ब्लॉग नहीं थे उसी तरह सविता भाभी के पहले इंटरनेट पर पॉर्न नहीं था। नारी की स्वाधीनता का ज़िक्र वाया सविता भाभी होगा यह तो खैर यह साईट बनाने वालों ने भी न सोचा होगा। विनीत की समझ का भी जवाब नहीं जो समझ रहे हैं कि टिप्पणियाँ वाकई औरतें ही कर रही हैं। भारत में कितनी सामान्य औरतों के अकेले, एकांत में इंटरनेट सर्फ करते पाया या सुना हो पता नहीं। खैर जमाये रहिये दही!
January 23, 2009 11:49 PM
विनाश said...
सही काम कर रहे हो आखिर तुम्हारी बिटिया भी बडी हो रही है उसे भी खुला समाज चाहियेगा . इसकी एक शाखा अंतर्वासना डाट काम का भी विज्ञापन कर डालो ना जहा बेटी और बाप आपस मे सेक्स कैसे करते है कि कहानिया छपती है
January 24, 2009 6:56 पम
आदर्श राठौर said...
कल को आपके मोहल्ले पर अन्य अश्लील साइट्स के विज्ञापन भी आ जाएं तो कोई हैरानी नहीं होगी।मैं तो सवाल उठाता हूं आपकी इस पोस्ट का समर्थन करने वालों पर? क्या किसी बड़े नाम के ऊलजुलूल लेख पर वाह! और उम्दा पेशकश आदि टिप्पणियां करना आपकी आदत हो गई है क्या?मैं विचलित हूं और क्षुब्ध भी।
January 25, 2009 12:47 ऍम
जनता ने तो इससे जायदा और भी बहुत कुछ कहा , जो हम आपको यहाँ नहीं बात सकते क्योंकि गाली यहाँ बर्जित है!!!
इस बात पर पागल हुआ सारा ''मोहल्ला'' सविताभाभी.कॉम के फैन क्लब में एक लड़की ने स्क्रैप लिखा कि ‘मैं सविताभाभी को रेगुलर पढ़ती हूं। मैं लेस्बियन हूं और चाहती हूं कि सविताभाभी के लेस्बियन के साथ संबंध दिखाये जाएं।’ संभव है, लड़की ने जो नाम फैन क्लब में दिये हों, वो गलत हो और अपनी पहचान छुपाने की कोशिश की गयी हो, लेकिन एक बात तो समझ में आती ही है कि सेक्स को लेकर लड़कियों ने भी अपनी पसंद औऱ नापसंद जाहिर करनी शुरू कर दी है।अपने यहां देखें, तो स्त्री और पुरुषों को लेकर सेक्स और शारीरिक संबंधों के मामले में अलग-अलग मानदंड रहे हैं। स्त्रियों के लिए सेक्स या सहवास वंशवृद्धि के लिए है, खानदान के चिराग को जलाये रखने के लिए है, बुढ़ापे के लिए लाठी की टेक के रूप में औलाद पैदा करने के लिए है। इसके आगे सहवास का उसके जीवन में कोई अर्थ नहीं है। इसमें न तो उसकी इच्छा, न खुशी और न ही संतुष्टि शामिल है। स्त्रियों के लिए सहवास धर्म की तरह है और जिस तरह धर्म का पालन इच्छापूर्ति के बजाय साधना के लिए की जाती है, उसी तरह स्त्रियों के लिए सहवास साधना के तौर पर पारिभाषित होकर रह जाती है, जिसकी अंतिम परिणति है, मातृत्व को प्राप्त करना, बस।पुरुषों के लिए भी सहवास एक धर्म की तरह है, जिसमें सिर्फ संतान पैदा करना और वंशवृद्धि करना तो होता ही है, लेकिन उसके जरिये आनंद प्राप्त करने की छूट मिलती नज़र आती है। नहीं तो तथाकथित महान ग्रंथों में, एक पुरुष के लिए कई स्त्रियों के विधान को धार्मिक कलेवर न दिया जाता। खैर...सेक्स को लेकर किसी गंभीर अवधारणा में न भी जाएं और फिलहाल इस बात को शामिल कर लें कि सेक्स शुरू से ही सिर्फ और सिर्फ संतान पैदा करने के लिए ज़रूरी विधान नहीं रहा है। पुरुषों के मामले में तो बिल्कुल भी नहीं। दबे-छुपे ही सही, लेकिन इसे आनंद के साथ स्वीकृति मिलती रही है। अब तो ये कॉन्सेप्ट के तौर पर है - कि सेक्स इज फॉर प्लेजर। सेक्स आनंद के लिए है। इस कॉन्‍सेप्ट का सबसे मज़बूत उदाहरण आपको देशभर के पुरुष टॉयलेटों में चिपके सफेद-काले इश्तेहारों में मिल जाएगें, जहां किसी क्रीम, तेल या कैप्शूल के बाकी गुणों को बताने के साथ-साथ मस्ती का पूरा एहसास जैसे पेट वर्ड शामिल किये होते हैं। देशभर में प्रकाशित होनेवाले दैनिक समाचार पत्रों में छपे विज्ञापनों में मिल जाएंगे। इस तरह की चीजों के विज्ञापन जहां कहीं भी आपको दिखेंगे, उससे कभी भी आप एहसास कर पाएंगे कि तेल, कैप्सूल और क्रीम की ज़रूरत संतान पैदा करने के लिए सहवास के दौरान आएंगे। खोई हुई दुर्बलता, पौरुष हासिल करने का नुस्खा, आनंद और मस्ती का एहसास ऐसे शब्दों से भरे विज्ञापन ये आसानी से स्थापित कर देते हैं कि सेक्स सिर्फ संतान के लिए ही नहीं, प्‍लेज़र के लिए भी किये जाते हैं। इस संदर्भ में कंडोम को सेक्स एज ए प्लेजर की संस्कृति को बढ़ाने का सबसे मज़बूत माध्यम मान सकते हैं। इन सबके बावजूद भी अगर कोई अभी भी इसे धार्मिक कार्य औऱ साधना जैसे शब्दों से जोड़ कर देखता है, तो वो इसके बहाने दर्शन और अध्यात्म पर बहस करना चाहता है या फिर पाखंड फैलाने का काम करना चाहता है। और मैं इन दोनों से बचना चाहता हूं।लेकिन प्लेजर का यही कॉन्सेप्ट ज़रा स्त्रियों के मामले में लागू करके देखिए। लागू तो दूर, समाज का एक बड़ा तबका कैसे आपको काट खाने के लिए दौड़ता है। कृष्णा सोबती ने अपने उपन्यास मित्रो मरजानी में एक स्त्री को अपने पति से शारीरिक तौर पर असंतुष्‍ट होने और उसे इसी आधार पर अस्वीकार कर देने की बात की, तो पूरा हिंदी समाज पिल पड़ा। स्त्री-विमर्श का एक सिरा जब ये कहता है कि देह के जरिये भी मुक्ति संभव है, तो पितृसत्तात्मक समाज आग-बबूला हो उठता है। तमाम तरह की मुक्ति और बदलावों की बात कर लेने के बाद स्त्री-मुक्ति और सेक्स के स्तर पर बात करने की कोशिश की जाए, तो समाज उसे पचा ही नहीं पाता। वो इतना घबरा जाता है कि उसे लगता है कि स्त्रियों को आड़े हाथों लेने के लिए, उसे, यौन-शुचिता जैसे सवालों से घेरकर ही तो बेड़‍ियों को मज़बूत बांधे रखा जा सकता है। अब जब वो सेक्स को भी रोजमर्रा की चर्चा में शामिल करने लग गयीं, उसमें भी अपनी पसंद और नापसंद बताने लग गयीं, तो फिर ऐसा क्या बच जाएगा, जिससे कि सामंती और गुलामी की संस्कृति को जिंदा रखा जा सकेगा।अब आप ही बताइए, ऐसे में, कोई लड़की नियमित अपडेट होनेवाले सविताभाभी.कॉम के पन्ने पढ़ती है, और तो और, अपनी पसंद भी फैन क्लब में ठोंक जाती है, तो ऐसी लड़कियों का क्या कर लेंगे आप। सिवाय दिन-रात ये मनाने के कि हे भगवान ऐसी लड़कियों की संख्या न बढ़े।
हालाकि जो हुआ अच्छा हुआ,जो होगा सो अच्छा होगा अविनाश जी समझदार आदमी है वे जानते है ब्लॉग्गिंग में अब्बल कैसे बना जाता है !!खैर हम आपको पढ़वाते है हमारे पास आया एक आरोप
''मोहल्ला ने ये शोध किसी भी प्रकार के सामाजिक हित के लिए नहीं किया है बल्कि आर्थिक लाभ के लिए किया है ,इससे पहेले सविताभाभी.कॉम ने एक न्यूज़ चॅनल को भी पैसे देकर खरीदा था,इस लिए जायदा दिमाग चलने वाली कोई बात नहीं है !'' -सोनिया कपूर cvn news sagar




12 comments:

  1. अरे बहुत खूब !!
    मगर कोई फायदा नहीं,अविनाश बड़ा बेसर्म आदमी है ,और नंगेपन का सौकीन भी
    उसका काम चलता रहेगा!!

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  2. सविता भाभी के बारे में पहेले तो नहीं सुना था
    लेकिन जब से इस पर शोध हुआ तो पता चल गया,अब इसमें आश्चय वाली क्या बात है मुझ जैसे कई लड़किओं को पता चल जायेगा !
    हो सकता है कई तो नियमित पाठक भी बन जाये !

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  3. मोहल्ला बहुत बड़ा ब्लॉग है क्या..तभी तो मैं सोचती थी की सविता भाभी पर इतने पाठक कैसे
    अब समझ आया की सब इन लोगों की कृपा से है
    अगर आप मेरे ब्लॉग पर से लिख देते तो क्या चला जाता

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  4. मेहनत रंग लाती है,और अविनाश जी की मेहनत भी जरुर रंग लाएगी..
    अविनाश जी होसला रखिये आपका ब्लॉग अभी तीसरे नंबर पर है,अगर आप इसी तरह का नंगापन फैलाते रहे तो आपका नंबर एक पक्का है !

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  5. सविता भाभी के बारे में सच आज से पहले पता नहीं था,लेकिन आज देखा तो लगा की बेहद भद्दा वेबपेज है,इन पर लगाम की जरुरत है

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  6. मीडिया को इस तरह के मुद्दों को बड़ा संभल कर उठाना पड़ता है क्योंकि जरा सी गलती से परिणाम उल्टे हो जाते है यही हुआ मोहल्ले की टीम के साथ ,पर हम आपके प्रयास की तारीफ तो कर ही सकते है !

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  7. अविनाश जी तहे दिल से आपके प्रयास की सराहना करता हूँ ,हमारा देश ही विरोध की नींव पर बना है इसलिए उसका भी ख्याल रखना ही पड़ता है !
    आपकी सोच बहुत गहरी है जो उपयोगी है !

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  8. इसमें क्या फर्क पडता है आप भी तो मोहल्ला की पब्लिसिटी बढा रहे हैं ! लिंक नहीं दिया तो क्या !

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  9. हमारा मकसद न मोहल्ला को पहचान दिलाना था न पहचान छीनना हमने जो महसूस किया सो कहा !

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  10. हम तो शर्मसार हुए क्योंकि हम मोहल्ला के पाठक थे. बहुत ही घटिया आदमी निकला.

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  11. @@@@ सब ने मिलकर भारतीय संस्कर्ति की माँ ,,,,,,,,,,दी ,,,,,

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
--- संजय सेन सागर